introduction

संसदीय कार्य विभाग का परिचय

भारत के संविधान द्वारा मंत्रि-परिषद् की संयुक्त रूप से विधान-मण्डल के प्रति उत्तरदायी होने की व्यवस्था की गई है । वस्तुत: ऐसी व्यवस्था कर सरकार के संसदीय स्वरूप की संकल्पना की गई । विधान-मण्डल एक अत्यन्त व्यस्त निकाय होता है । इसमें न केवल सरकारी तथा गैर-सरकारी सदस्यों के विधेयक प्रस्तुत किए जाते है वरन् सदस्यगण नाना प्रकार से जनता की समस्याओं की ओर सदन का ध्यान आकर्षित करते है और सरकार के विभिन्न कार्यकलापों को प्रशनगत करते है । शासन को इन सब का निर्धारित समयावधि में समुचित उत्तर देना आवश्यक होता है । इस वृहद् और बहुविध संसदीय कार्य का निष्पादन दक्षतापूर्वक किया जाए, इसके लिए विधान-मण्डल और सरकार के बीच समन्वय की आवश्यकता महसूस की गई । तदनुसार केन्द्र तथा अन्य राज्यों की भांति इस राज्य में भी स्वतत्र रूप से एक संसदीय कार्य विभाग की स्थापना वर्ष 1986 में हुई ।